आईएएस अधिकारी सोनिया मीना का नाम इन दिनों मध्य प्रदेश और प्रशासनिक हलकों में सुर्खियों में है। 2013 बैच की आईएएस अधिकारी और राजस्थान की निवासी सोनिया मीना वर्तमान में नर्मदापुरम जिले की कलेक्टर हैं। अपने साहसिक फैसलों और रेत माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए उन्हें “दबंग अधिकारी” कहा जा रहा है।
प्रशासनिक सेवा में दिलचस्पी और शुरुआती सफर
सोनिया मीना का परिवार सरकारी सेवा में रहा है, जिससे उनका रुझान भी प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़ा। यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला। उनकी पहली नियुक्ति राजगढ़ जिले में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के रूप में हुई। इसके बाद उमरिया और मुरैना जिला परिषद में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
रेत माफियाओं और अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
2017 में छतरपुर जिले में तैनाती के दौरान सोनिया मीना ने रेत माफियाओं का डटकर सामना किया। एक मामले में उन्होंने अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर को पकड़ा और चालक की बदसलूकी पर तुरंत सख्त कार्रवाई की। इस घटना ने उनकी दबंग छवि को और मजबूत किया।
अनूपपुर जिले में चुनौतीपूर्ण कार्यकाल
अनूपपुर की कलेक्टर रहते हुए सोनिया मीना ने कोयला खदान उत्खनन योजना और कोल इंडिया के साथ समन्वय का कठिन कार्य किया। इस दौरान उन्होंने आदिवासी भूमि पर अतिक्रमण और अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए। रेत माफियाओं के खिलाफ अभियान चलाकर उन्होंने कई वाहन और नावें जब्त कीं और दोगुना जुर्माना वसूला।
आदिवासी जमीनों को कराया मुक्त
मीना ने अनूपपुर में आदिवासियों की हड़पी हुई जमीनें वापस दिलाने में अहम भूमिका निभाई। माफियाओं द्वारा अवैध रूप से कब्जाई गई जमीन को छुड़ाकर उन्होंने गरीब और आदिवासी वर्ग के अधिकारों की रक्षा की।
दबंग छवि और प्रशासनिक काबिलियत
अपने साहसी फैसलों और जमीनी काम की वजह से आईएएस सोनिया मीना को एक सख्त और प्रभावी अधिकारी के रूप में जाना जाता है। उनके प्रयासों ने प्रशासनिक सेवा में ईमानदारी और साहस का उदाहरण प्रस्तुत किया है।


