“ई-कॉमर्स की मनमानी पर लगे अंकुश – राष्ट्रीय रिटेल विकास परिषद का गठन समय की मांग : कैट”
देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य श्री अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन श्री जितेन्द्र दोशी, श्री विक्रम सिंहदेव, अध्यक्ष श्री परमानंद जैन, महामंत्री श्री सुरेन्द्र सिंह, कोषाध्यक्ष श्री अजय अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष श्री राजेंद्र जग्गी, श्री राम मंथन, श्री वासु माखीजा, श्री भरत जैन, श्री राकेश ओचवानी, श्री शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि कैट ने सरकार से ई-कॉमर्स एवं क्विक कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती मनमानी और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
श्री अमर पारवानी ने संसद द्वारा पारित जन विश्वास विधेयक 2.0 का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह कदम व्यापार में विश्वास और सुगमता को बढ़ाने वाला है। इससे देश के व्यापारियों और उद्यमियों को मजबूती मिलेगी और एक सकारात्मक कारोबारी माहौल बनेगा।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि विदेशी पूंजी से संचालित कुछ ई-कॉमर्स कंपनियां भारत के व्यापारिक संतुलन को बिगाड़ रही हैं। देश के 9 करोड़ से अधिक व्यापारी, जो आपूर्ति श्रृंखला और रोजगार का मुख्य आधार हैं, उनके सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो रही है।
श्री पारवानी ने बताया कि प्रिडेटरी प्राइसिंग, अत्यधिक छूट (डीप डिस्काउंटिंग), डार्क पैटर्न्स, मार्केटप्लेस के नाम पर इन्वेंट्री मॉडल, चुनिंदा विक्रेताओं को बढ़ावा देना और डार्क स्टोर्स का तेजी से विस्तार—ये सभी प्रथाएं निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के खिलाफ हैं और छोटे व्यापारियों के लिए खतरा बन रही हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी कंपनियों को भारत में मनमानी करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। ऑफलाइन और ऑनलाइन व्यापार के बीच समान अवसर जरूरी है, तभी देश की अर्थव्यवस्था संतुलित और मजबूत बनेगी।
कैट ने सरकार से मांग की कि राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति को जल्द लागू किया जाए, सख्त और पारदर्शी नियम बनाए जाएं तथा इन गतिविधियों पर निगरानी के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की जाए।
संस्थागत सुधार की जरूरत बताते हुए श्री पारवानी ने राष्ट्रीय रिटेल विकास परिषद के गठन की मांग की, ताकि व्यापारियों को नीति निर्माण में उचित भागीदारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि व्यापार से जुड़े निर्णयों में व्यापारियों की भागीदारी जरूरी है। इस परिषद के गठन से नीतियां अधिक व्यवहारिक और जमीनी जरूरतों के अनुरूप बनेंगी।
अंत में उन्होंने कहा कि जब भारत वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है, तब यह जरूरी है कि विकास निष्पक्ष, संतुलित और सभी के लिए लाभकारी हो।
“मजबूत व्यापार ही मजबूत भारत की नींव है।”


