मुंब्रा की AIMIM पार्षद सहर शेख पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप, ठाणे तहसीलदार ने FIR के दिए आदेश

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मुंब्रा की AIMIM पार्षद सहर शेख पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप, ठाणे तहसीलदार ने FIR के दिए आदेश

ठाणे (महाराष्ट्र):महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र से की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ठाणे तहसीलदार ने सहर शेख और उनके पिता यूनुस शेख के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी एजेंसियों को गुमराह करने के आरोप में मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।

यह कार्रवाई सिद्दीकी फराह शबाब अहमद द्वारा की गई शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सहर शेख ने अधिकारियों को गुमराह कर महाराष्ट्र में फर्जी जाति प्रमाण पत्र हासिल किया।

फर्जी प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप
जांच में सामने आया है कि सहर शेख ने मुंबई शहर कलेक्टर कार्यालय से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। इस खुलासे के बाद उनके पार्षद पद पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं और बर्खास्तगी की अटकलें तेज हो गई हैं।

इस मामले पर एबीपी न्यूज से बातचीत में सहर के पिता यूनुस शेख ने कहा कि उन्हें इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल मुंब्रा में नहीं हैं और जानकारी जुटाने के बाद ही इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया देंगे।

गाजियाबाद मूल के बताए जा रहे यूनुस शेख
जानकारी के अनुसार, यूनुस शेख मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद क्षेत्र के निवासी हैं, जो बाद में महाराष्ट्र आकर बस गए। आरोप है कि उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के फॉर्म-8 का उपयोग कर अधिकारियों को गुमराह करते हुए जाति प्रमाण पत्र हासिल किया, जबकि प्रवासियों के लिए फॉर्म-10 लागू होता है।

बताया जा रहा है कि इसी आधार पर सहर शेख ने ठाणे नगर निगम चुनाव के लिए मुंबई कलेक्टर कार्यालय से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया और वार्ड 30 से (AIMIM) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर पार्षद बनीं। चुनाव के दौरान उनके ‘कैसे हराया?’ बयान ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया था।

शिकायत और जांच की प्रक्रिया
शिकायतकर्ता सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद ने ठाणे उपमंडल अधिकारी कार्यालय में यूनुस शेख के जाति प्रमाण पत्र के सत्यापन की मांग की थी। आरोप है कि गलत फॉर्म का इस्तेमाल कर प्रमाण पत्र हासिल किया गया।

18 मार्च को हुई सुनवाई में यूनुस शेख बीमारी का हवाला देते हुए उपस्थित नहीं हुए, जबकि उनके वकीलों ने दस्तावेजों की प्रतियां पेश कीं। इसके बाद 23 मार्च को दोबारा सुनवाई हुई, जिसमें तहसीलदार ने प्रमाण पत्र में कई त्रुटियों की ओर इशारा किया।

साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि ठाणे निवासी होने के बावजूद सहर शेख ने मुंबई कलेक्टर कार्यालय से जाति प्रमाण पत्र क्यों प्राप्त किया।

आगे की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल इस मामले में FIR दर्ज होने की प्रक्रिया जारी है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो सहर शेख की पार्षद सदस्यता पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी तेज हो सकती है।

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