वेतन नहीं मिलने से नाराज सफाई कर्मचारियों का धरना, नगर निगम पर लगाए गंभीर आरोप
दुर्ग। वेतन नहीं मिलने से नाराज सफाई कर्मचारियों ने मंगलवार को दुर्ग नगर निगम के मुख्य गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए नगर निगम और शहर सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया। इस विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में सफाई कर्मचारी शामिल हुए, जिन्होंने काम बंद कर निगम परिसर का घेराव किया।
दो महीने से नहीं मिला वेतन, अनुचित कटौती का भी आरोप
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। जिन कर्मचारियों को वेतन दिया भी गया है, उनके वेतन में चार हजार से छह हजार रुपये तक की अनुचित कटौती की गई है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
“हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं” – ध्रुव कुमार सोनी
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश संयोजक ध्रुव कुमार सोनी ने कहा, “हम हक और अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। किसी को 4 हजार, किसी को 5 हजार, किसी को 6 हजार रुपये कटौती कर वेतन दिया गया है। यह बेहद निंदनीय है। हमारी मांग है कि ठेका प्रथा समाप्त की जाए और सभी कर्मचारियों को पूर्व की तरह सीधे नगर निगम से वेतन मिले।”
कर्मचारियों की चेतावनी: मांगे पूरी होने तक काम पर वापसी नहीं
सफाई कर्मियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। उन्होंने मणिकंचन केंद्र में काम करने से इनकार करते हुए कहा कि उन्हें पहले की तरह नगर निगम से ही भुगतान किया जाए।
नगर निगम पर लगाए अनदेखी के आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकार और नगर निगम प्रशासन उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें स्थायी समाधान मिले और भविष्य में वेतन में न तो देरी हो और न ही कटौती।
“कोई सुरक्षा नहीं, मेडिकल कैंप तक नहीं लगा” – वाल्मीकि सिंह
प्रदेश अध्यक्ष, सफाई मजदूर संघ दुर्ग, वाल्मीकि सिंह ने कहा, “हमें 9 घंटे काम का शेड्यूल दिया गया है, लेकिन कोई सुरक्षा नहीं है। आज तक किसी भी कर्मचारी के लिए मेडिकल कैंप नहीं लगाया गया है। सभी जरूरी टेस्ट होने चाहिए, लेकिन व्यवस्था मनमानी से चल रही है।”
महापौर ने किया आरोपों से इनकार
दुर्ग की महापौर अलका बाघमार ने कर्मचारियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी का वेतन बकाया नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई कर्मचारी पांच दिन से ज्यादा छुट्टी करता है, तो पेमेंट कटता है। मणिकंचन संस्था केंद्र सरकार की योजना है, जिसे अब लागू किया जा रहा है। पहली तन्ख्वाह दी गई है। कर्मचारियों को आगे आकर बातचीत करनी चाहिए और विषय को समझना चाहिए।”
महापौर का कहना है कि मणिकंचन केंद्र एक केंद्र सरकार की पहल है, जिसमें सभी सफाई कर्मचारियों को शामिल किया गया है। इसी को लेकर कर्मचारी विरोध कर रहे हैं, जबकि उन्हें संवाद के लिए आगे आना चाहिए।
साफ चेतावनी: हर दिन होगा प्रदर्शन
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि यदि जल्द से जल्द वेतन से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे हर दिन निगम के मुख्य गेट पर इसी तरह विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे।

