बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में प्रतिबंधित मार्ग पर मोहर्रम जुलूस ले जाने की कोशिश, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
भोपाल, इंदौर, उज्जैन और अन्य जिलों में मातम और ताजिया जुलूस निकले; पुलिस रही अलर्ट पर, ड्रोन से निगरानी
गुना में भगवा झंडियां हटाने की मांग पर विवाद, कमेटी ने दी सफाई
मध्यप्रदेश में रविवार को मोहर्रम के मौके पर प्रदेशभर में अकीदतमंदों ने करबला की शहादत को याद करते हुए मातम किया और ‘या हुसैन’ की सदाओं के बीच जुलूस निकाले। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, गुना समेत अन्य जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस बल अलर्ट पर रहा और ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई।
उज्जैन: प्रतिबंधित मार्ग पर घोड़ा ले जाने की कोशिश, पुलिस ने किया हल्का लाठीचार्ज
उज्जैन में रविवार देर रात निकले मोहर्रम के जुलूस के दौरान उस समय तनाव उत्पन्न हो गया जब कुछ लोग घोड़ा लेकर पुलिस द्वारा प्रतिबंधित मार्ग की ओर जाने लगे। बार-बार समझाइश के बावजूद न रुकने पर भीड़ ने बैरिकेड्स गिरा दिए, जिससे दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। इस मामले में आयोजक इरफान खान के खिलाफ जीवाजीगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। अन्य आरोपियों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की जा रही है।
गुना: ताजिया कमेटी के पत्र पर मचा बवाल, कमेटी अध्यक्ष ने दी सफाई
गुना जिले में मोहर्रम के जुलूस से पहले एक पत्र को लेकर विवाद हो गया। ताजिया इंतजामिया कमेटी ने प्रशासन को पत्र लिखकर जुलूस मार्ग में लगी भगवा झंडियां हटाने की मांग की थी, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
विवाद बढ़ने पर कमेटी अध्यक्ष यूसुफ खान ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाएं आहत करना नहीं था, बल्कि वे सिर्फ झंडियों को क्षति से बचाना चाहते थे। उन्होंने क्षमा मांगते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराई जाएगी।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मोहर्रम के महीने की 10वीं तारीख को यौम-ए-आशूरा मनाया जाता है। यह दिन हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की करबला में दी गई शहादत की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। जुलूस के दौरान ताजिए निकाले जाते हैं और करबला की गाथा को मातम व तकरीरों के माध्यम से जीवंत किया जाता है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल ने जगह-जगह तैनाती की थी। जुलूस के मार्गों पर निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली गई। प्रशासन ने पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक व्यवस्था की थी।


