मानसून में आँखों के के प्रति सतर्क रहना ज़रूरी है – नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मेहरा

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मानसून में आँखों के के प्रति सतर्क रहना ज़रूरी है – नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मेहरा

नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मेहर – छत्तीसगढ़ नेत्र चिकित्सालय रायपुर

बरसात की सुहानी फुहारें जो हमें भाती हैं वह अपने साथ कुछ खतरे भी लेकर आती हैं। बरसात में दौरान वायरस सबसे ज्यादा सक्रिय अवस्था में होते हैं। ऐसे में शरीर में तो इनका प्रतिकूल असर दिखता ही है और वायरल संक्रमण से हम बीमार तो होते ही हैं इस दौरान हमारे शरीर के सबसे संवदेनशील अंग आँखों के लिए और अधिक खतरा बढ़ जाता है। यह कहना है छत्तीसगढ़ नेत्र चिकित्सालय रायपुर के सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मेहरा का। डॉ. मेहरा बताते हैं कि बरसात का मौसम, आँखों के संक्रमण का सबसे अनदेखा खतरा है। डॉ. अभिषेक मेहरा, पिछले कई वर्षों से मानसून में बढ़ते नेत्र रोगों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हर साल मानसून के दौरान छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल में कंजंक्टिवाइटिस, फंगल इंफेक्शन, एलर्जी और पलकों के फोड़े जैसे मामलों की संख्या दोगुनी हो जाती है।

गौरतलब है कि लोग अक्सर मान लेते हैं कि आँखों में हल्की लालिमा या पानी आना मामूली बात है, लेकिन यही लक्षण आगे चलकर गंभीर नेत्र संक्रमण का रूप ले सकते हैं। डॉ. मेहरा के मुताबिक, मानसून में वातावरण में फैली नमी, गंदगी और बैक्टीरिया तेजी से आँखों को प्रभावित करते हैं। कई बार लोग बारिश में भीगने के बाद गंदे हाथों से आँखें रगड़ते हैं, या संक्रमित तौलिये और रुमाल का उपयोग करते हैं, जो संक्रमण को फैलाने का सीधा रास्ता बन जाते हैं।

डॉ. मेहरा के अनुसार आँखों में होने वाले संक्रमण में सबसे आम कंजंक्टिवाइटिस है, जिसे लोग ‘आई फ्लू’ के नाम से भी जानते हैं। ये संक्रमण बेहद तेजी से फैलता है, एक आँख से दूसरी, और फिर पूरे परिवार में। कुछ मामलों में मरीज को गुहेरी हो जाती है, यानी पलक पर सूजन वाला फोड़ा, जो न सिर्फ कष्टदायक होता है बल्कि कई बार सर्जरी तक ले जाता है।

छत्तीसगढ़ आई हॉस्पिटल, जो पिछले 45 वर्षों से छत्तीसगढ़ में आँखों की देखभाल का प्रमुख केंद्र रहा है, हर साल ऐसे सैकड़ों मरीजों का इलाज करता है। कई बार ऐसे भी केस सामने आते हैं जहाँ मरीज ने पहले खुद इलाज किया, दवाईयाँ बदलते रहे, और जब स्थिति गंभीर हो गई, तब अस्पताल पहुँचे।

डॉ. अभिषेक मेहरा इस बात पर जोर देते हैं कि मानसून में आँखों की कोई भी शिकायत, चाहे वह लालिमा हो, खुजली हो, बार-बार पानी आना हो, या धुंधला दिखना, उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। देरी करना आपकी आँखों की रोशनी पर भारी पड़ सकता है।

इस मौसम में अगर आपकी आँखों में कोई भी परेशानी हो रही है, तो अनुमान न लगाएं, सीधे विशेषज्ञ से मिलें। छत्तीसगढ़ नेत्र चिकित्सालय में डॉ. अभिषेक मेहरा आँखों के उपचार में समर्पित रूप से कार्य कर रहे हैं जहाँ आज भी मात्र 100/- रूपए की फीस लेकर तीन तरह की आँखों की जांच की जाती है और यह एक समाज सेवा हेतु विशेष कार्य है |

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